Brief By Jagran.com / 6:08 PM on 24 Aug 2026
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के नियम को लेकर सियासत तेज हो गई है. नियम के विरोध में चालकों ने सोमवार से तीन दिनों की हड़ताल शुरू कर दी है. इसी बीच राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने चालकों को बड़ी राहत देने वाला बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मराठी सीखने के लिए चालकों को दिए गए एक महीने के समय से पहले यदि कोई RTO अधिकारी गलत तरीके से जुर्माना लगाता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने कहा कि तय समयसीमा खत्म होने से पहले किसी चालक पर जबरन कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. सरकार के इस रुख को हड़ताल के बीच चालकों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है.
प्रताप सरनाईक ने बताया कि अब तक 1,65,600 गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालक स्वेच्छा से मराठी भाषा की कक्षाओं में शामिल हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि ये चालक मराठी सीखने का प्रयास कर रहे हैं. हालांकि, मंत्री ने यह भी साफ किया कि जो चालक जानबूझकर भाषा सीखने से इनकार करेंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. परिवहन विभाग के 12 अगस्त के सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक, जिन ऑटो और टैक्सी चालकों को कामचलाऊ मराठी नहीं आती, उन्हें RTO की ओर से पहले एक महीने का नोटिस और भाषा सीखने का अवसर दिया जाएगा. इस अवधि में चालकों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना है.
नियम के अनुसार, एक महीने की समयसीमा पूरी होने के बाद भी यदि चालक मराठी भाषा की शर्त पूरी नहीं करते हैं, तो उनके लाइसेंस और बैज को निलंबित किया जा सकता है. इसके बाद उन्हें मराठी सीखने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया जाएगा. यदि इस अतिरिक्त अवधि के बाद भी चालक निर्धारित शर्त पूरी नहीं करते हैं, तो उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है. इस फैसले को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है. शिवसेना नेता संजय निरुपम ने हाल ही में परिवहन मंत्री से मुलाकात कर चालकों को एक महीने का नोटिस दिए बिना 25 हजार रुपये तक के जुर्माने की कार्रवाई रोकने की मांग की थी. अब मंत्री की चेतावनी के बाद इस विवाद में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी.