Back

मंगलुरु रेलवे क्षेत्र के पुनर्गठन पर केरल-कर्नाटक आमने-सामने, 1 अक्टूबर से बदलेगा डिवीजन

Brief By Jagran.com / 6:03 PM on 24 Aug 2026


रेलवे बोर्ड के 21 अगस्त को जारी आदेश के बाद केरल और कर्नाटक के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. आदेश के मुताबिक, 1 अक्टूबर से मंगलुरु क्षेत्र को उल्लाल तक दक्षिण रेलवे के पलक्कड़ डिवीजन से हटाकर दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूरु डिवीजन में शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही दोनों रेलवे जोन के बीच इंटरचेंज पॉइंट पैडिल से बदलकर उल्लाल हो जाएगा. वहीं थोकुर स्टेशन कोंकण रेलवे के नियंत्रण में रहेगा और कोंकण रेलवे तथा दक्षिण पश्चिम रेलवे के बीच नए इंटरचेंज पॉइंट के रूप में काम करेगा. इस फैसले को लेकर केरल में विरोध तेज है, जबकि कर्नाटक में इसे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है. केरल के UDF सांसद एम.के. राघवन, ई.टी. मोहम्मद बशीर और शफी परमबिल ने फैसले को एकतरफा और अस्वीकार्य बताते हुए तिरुवोणम के दिन पलक्कड़ डिवीजनल रेलवे मैनेजर कार्यालय के सामने धरना देने की घोषणा की है.

केरल के सांसदों और नेताओं की सबसे बड़ी चिंता राजस्व को लेकर है. उनका दावा है कि मंगलुरु पोर्ट और आसपास के गुड्स यार्ड्स से पलक्कड़ डिवीजन को हर साल करीब 1,000 से 1,100 करोड़ रुपये की आय होती है. पलक्कड़ डिवीजन के कुल माल ढुलाई राजस्व का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा मंगलुरु क्षेत्र से आने का दावा किया जा रहा है. पनाम्बुर गुड्स यार्ड ने पिछले वित्तीय वर्ष में अकेले 625 करोड़ रुपये से अधिक का माल संभाला था. सांसदों का कहना है कि क्षेत्र के अलग होने से पलक्कड़ डिवीजन की रोजाना कमाई और कुल राजस्व में बड़ी गिरावट आ सकती है. इससे नई रेल परियोजनाओं, ट्रेनों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मिलने वाले फंड पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने फैसले पर पुनर्विचार के लिए प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को पत्र भेजने की बात कही है.

वहीं कर्नाटक में इस फैसले का स्वागत किया गया है. मंगलुरु के सांसद बृजेश चौटा समेत स्थानीय राजनीतिक और व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि मंगलुरु के रेलवे नेटवर्क को एक ही डिवीजन के तहत लाने से प्रशासनिक कामकाज बेहतर होगा और विकास परियोजनाओं में तेजी आएगी. तटीय कर्नाटक के प्रतिनिधियों का आरोप रहा है कि भारी राजस्व देने के बावजूद क्षेत्र को पर्याप्त रेल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं मिला. दूसरी ओर, केरल बीजेपी नेता पी.के. कृष्णदास ने विरोध को राजनीतिक बताया और कहा कि फैसले से यात्रियों की सेवाओं पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने केंद्र द्वारा केरल के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किए गए बजट प्रावधानों का भी उल्लेख किया. बदलाव के बाद प्रभावित कर्मचारियों को दक्षिण रेलवे में बने रहने या दक्षिण पश्चिम रेलवे में शामिल होने का विकल्प दिया जाएगा.

Read more on Jagran.com