Brief By Newsbrief / 4:35 PM on 06 Jul 2026
क्या आपने कभी सोचा है कि सुपरमार्केट के बिलिंग काउंटर के पास हमेशा चॉकलेट, टॉफी, च्युइंग गम, बैटरी और दूसरी छोटी-छोटी चीजें ही क्यों रखी जाती हैं? दरअसल, इसके पीछे एक सोची-समझी मार्केटिंग रणनीति काम करती है, जिसे 'इम्पल्स बाइंग' यानी बिना योजना के अचानक खरीदारी कहा जाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, खरीदारी के दौरान ग्राहक कई फैसले ले चुका होता है. इस प्रक्रिया में मानसिक थकान, जिसे 'डिसीजन फटीग' कहा जाता है, बढ़ जाती है. ऐसे समय में बिलिंग काउंटर पर रखे कम कीमत वाले उत्पाद आकर्षक लगने लगते हैं और ग्राहक उन्हें बिना ज्यादा सोचे खरीद लेता है.
इस रणनीति में बच्चों की मनोविज्ञान का भी ध्यान रखा जाता है. चॉकलेट और टॉफियां अक्सर बच्चों की नजर और पहुंच की ऊंचाई पर रखी जाती हैं. भुगतान के दौरान बच्चे इन्हें खरीदने की जिद करते हैं और कई बार अभिभावक उनकी मांग मान लेते हैं.
रिटेल कारोबार में ऐसी छोटी-छोटी अतिरिक्त खरीदारी से कंपनियों को बड़ा मुनाफा होता है. इससे बचने के लिए खरीदारी से पहले सूची बनाएं, उसी तक सीमित रहें, बिलिंग काउंटर पर रखे सामान के आकर्षण से बचें और बच्चों को पहले से समझाएं. अगली बार सुपरमार्केट जाएं तो याद रखें कि हर दिखने वाली चीज आपकी जरूरत नहीं, बल्कि एक स्मार्ट मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है.