Brief By Newsbrief / 5:21 PM on 05 Jul 2026
संभावित कम बारिश और अल-नीनो के प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए विशेष कंटीजेंसी कृषि योजना तैयार की है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बनाई गई इस योजना का उद्देश्य मौसम की अनिश्चित परिस्थितियों में भी किसानों की फसल और आय को सुरक्षित रखना है.
कृषि विभाग ने किसानों को कम और मध्यम अवधि में तैयार होने वाली फसलों का चयन करने की सलाह दी है, ताकि मॉनसून में देरी, कम वर्षा या लंबे सूखे जैसी परिस्थितियों का असर कम हो. पारंपरिक धान रोपाई की जगह डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक अपनाने की भी सिफारिश की गई है. इस तकनीक से लगभग 20 प्रतिशत सिंचाई जल की बचत होती है, प्रति एकड़ करीब ₹5,000 तक लागत कम होती है और फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है.
कम वर्षा वाले और ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को धान के बजाय अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल और सोयाबीन जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी गई है. साथ ही कतार में बुवाई, बीज उपचार और नमी संरक्षण जैसी वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है.
राज्य सरकार ने किसानों को खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिया है. केंद्र सरकार से अतिरिक्त आवंटन मिलने के बाद राज्य को 46,000 टन अतिरिक्त DAP खाद उपलब्ध कराई गई है, जिससे खरीफ सीजन में उर्वरक की कमी नहीं होगी.
इसके अलावा किसानों को IMD के सचेत, दामिनी और मेघदूत ऐप का उपयोग करने तथा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विशेषज्ञों और कृषि विभाग की सलाह लेकर ही खेती से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने की अपील की गई है. सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण और सही फसल चयन से कम बारिश की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन और आय सुनिश्चित की जा सकती है.