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150 वर्षों से हिंदू परिवार मना रहे मुहर्रम, सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल

Brief By Newsbrief / 5:25 PM on 20 Jun 2026


बांका जिले के धोरैया प्रखंड का तिलौन्धा गांव सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता की अनोखी मिसाल पेश कर रहा है. यहां भेलाय पंचायत के अंतर्गत रहने वाले 16 हिंदू परिवार पिछले लगभग 150 वर्षों से मुहर्रम का त्योहार मनाते आ रहे हैं. इस वर्ष भी शनिवार शाम केला कट्टी की रस्म के साथ मुहर्रम की शुरुआत हो गई, जबकि 26 जून को पहलाम का आयोजन किया जाएगा.

मुहर्रम के दौरान गांव में तासे की गूंज सुनाई देने लगी है. इस अवसर पर लोग निशान और ताजिये के साथ जुलूस निकालते हैं तथा लाठी, डंडा और फरसा जैसे पारंपरिक करतबों का प्रदर्शन करते हुए कर्बला मैदान पहुंचते हैं. वहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार निशान का पहलाम किया जाता है.

मान्यता है कि कर्बला की जंग में इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम मातम के रूप में मनाया जाता है. तिलौन्धा गांव में इस परंपरा की शुरुआत भगलु जमेदार ने की थी. उनके वंशज सोतो चौहान बताते हैं कि उनके पूर्वज बसतपुर गांव स्थित पीर बाबा स्थान पर खीर और अन्य पकवान चढ़ाने जाया करते थे. उसी दौरान घटी एक घटना के बाद परिवार ने मुहर्रम मनाने की परंपरा शुरू की, जो आज भी जारी है.

गांव की यह परंपरा धार्मिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का प्रतीक बन चुकी है. यहां सभी समुदायों के लोग मिलकर इस पर्व को मनाते हैं, जो समाज को एकता और सौहार्द का संदेश देता है.

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