Brief By Newsbrief / 3:20 PM on 15 Jun 2026
अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' के दोबारा खुलने का रास्ता साफ हो गया है. शुक्रवार को जिनेवा में होने वाले इस आधिकारिक समझौते की घोषणा खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने की. इस जलमार्ग से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, जो 28 फरवरी को भड़के युद्ध के बाद से पूरी तरह बंद था. इस खबर के आते ही वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 4.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे ऊर्जा संकट से जूझ रहे फिलीपींस, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों को बड़ी राहत मिली है.
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट के खुलने और बारूदी सुरंगों के हटने के बाद सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे बड़े सप्लायर्स से तेल, एलएनजी और फर्टिलाइजर (खाद) की सप्लाई चेन फिर से बहाल हो जाएगी. हालांकि, महीनों से बाधित वैश्विक अर्थव्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लौटने में इस साल के अंत या अगले साल तक का समय लग सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के कारण खाड़ी देशों के प्रोडक्शन प्लांट्स को भारी नुकसान पहुंचा है और एलएनजी की कीमतों में गिरावट का वास्तविक असर दिखने में कम से कम तीन से छह महीने का समय लगेगा.
दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक, भारत के लिए यह समझौता बेहद फायदेमंद साबित होगा. खाड़ी देशों से तेल और कच्चे माल की आपूर्ति फिर से शुरू होने से भारत का इम्पोर्ट बिल (आयात खर्च) कम होगा, रुपये को मजबूती मिलेगी और घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव घटेगा. ईंधन सस्ता होने से देश के एविएशन, पेट्रोकेमिकल, फर्टिलाइजर और लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख सेक्टर्स को भारी मुनाफा होगा. हालांकि, जानकारों ने चेतावनी दी है कि यह राहत तभी तक बरकरार रहेगी जब तक कि मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में भू-राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है.