Brief By Newsbrief / 2:25 PM on 11 Jun 2026
NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक, मूल्यांकन संबंधी विवादों और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. इसी कड़ी में पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर में "युवा न्याय आंदोलन" के बैनर तले प्रदर्शन आयोजित किया गया. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन CJP का कहना है कि यह लड़ाई केवल NEET परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग से जुड़ी है.
आंदोलन के संयोजक अभिजीत दिपके ने कहा है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करती है, तो 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू किया जाएगा. आंदोलन को शिक्षा सुधारों के पक्षधर सोनम वांगचुक का समर्थन भी मिला है, जिससे इसकी चर्चा और बढ़ गई है.
संगठन का आरोप है कि NEET-UG पेपर लीक और मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े विवादों ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.
6 जून को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद इस अभियान को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिला है. छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग उठाई है. संगठन का दावा है कि उसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और वह केवल विद्यार्थियों की आवाज बुलंद कर रहा है.
आंदोलनकारियों ने लखनऊ, जयपुर, अमृतसर, बेंगलुरु और हैदराबाद सहित कई शहरों में भी प्रदर्शन की तैयारी की घोषणा की है. साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया गया है.