Brief By Newsbrief / 4:40 PM on 29 May 2026
प्रदेश का पहला डिजिटल एक्सप्रेसवे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर का अनुभव तो दे रहा है, लेकिन अधूरी तैयारियों के कारण यह सफर अब चुनौतीपूर्ण भी बनता जा रहा है. यूपीडा की ओर से एक्सप्रेसवे पर वाहनों का संचालन शुरू कर दिया गया है, जबकि कई जरूरी सुरक्षा इंतजाम अभी अधूरे हैं. वाहन चालक तेज रफ्तार में सफर कर रहे हैं, लेकिन सड़क पर अचानक सामने आ रहे जानवर और अव्यवस्थित तरीके से खड़े वाहन हादसों का कारण बन रहे हैं. रात के समय अंधेरे में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है.
सबसे बड़ी चिंता एक्सप्रेसवे पर नीलगाय और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही को लेकर है. पशुओं को रोकने के लिए लगाई गई सुरक्षा जाली पर्याप्त ऊंचाई की नहीं है, जिसके कारण नीलगाय आसानी से सड़क पार कर रही हैं. पिछले सप्ताह एक तेज रफ्तार कार नीलगाय से टकरा गई थी, जिसमें महिला यात्री और नीलगाय दोनों की मौत हो गई थी. इसके बावजूद केवल स्क्रीन पर चेतावनी संदेश चलाए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर मजबूत इंतजाम नहीं किए गए हैं. 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे वाहनों को अचानक रोकना संभव नहीं होता, जिससे बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है.
इसके अलावा एक्सप्रेसवे पर नॉन पार्किंग जोन में भी वाहन मनमाने तरीके से खड़े किए जा रहे हैं. कई चालक मोबाइल पर बात करने, आराम करने या फोटो खींचने के लिए अचानक वाहन रोक देते हैं. रात के समय यह स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है क्योंकि तेज रफ्तार से आ रहे वाहनों को खड़े वाहन समय पर दिखाई नहीं देते. स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के आसपास खेत और जंगल होने के कारण पशुओं की आवाजाही सामान्य है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था उसी हिसाब से मजबूत नहीं की गई है. ऐसे में प्रशासन को जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत है.