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JNU में विवाहित शोधार्थियों के लिए हॉस्टल रहना हुआ महंगा, नए नियम 1 जून से लागू

Brief By Newsbrief / 7:43 PM on 24 May 2026


Jawaharlal Nehru University में विवाहित पीएचडी शोधार्थियों के लिए हॉस्टल में रहना अब पहले से अधिक महंगा हो गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने महानदी एक्सटेंशन यानी सुबनसिर हॉस्टल के आवंटन नियमों और शुल्क संरचना में बड़ा बदलाव किया है. डीन ऑफ स्टूडेंट्स कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नए नियम 1 जून से लागू होंगे. इसी दिन से हॉस्टल आवंटन के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था को विश्वविद्यालय की नई पीएचडी नीति और बदली शैक्षणिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.

नई व्यवस्था के तहत शोधार्थियों को अब 30 हजार रुपये रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होगा. इसके अलावा एस्टेब्लिशमेंट शुल्क और कमरे का किराया मिलाकर पांच हजार रुपये प्रतिमाह तय किया गया है. बिजली और पानी का शुल्क वास्तविक खपत के आधार पर अलग से लिया जाएगा. विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिक्योरिटी डिपॉजिट, किराया और अन्य शुल्कों में हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी. अधिसूचना में गर्भवती छात्राओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को हॉस्टल आवंटन में प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर भी अब वही नियम लागू होंगे जो भारतीय छात्रों के लिए तय किए गए हैं.

विश्वविद्यालय ने हॉस्टल मैनुअल से एमफिल और जीरो सेमेस्टर से जुड़े सभी प्रावधान हटा दिए हैं. प्रशासन के अनुसार यूजीसी द्वारा 2022 में एमफिल कार्यक्रम समाप्त किए जाने और नई पीएचडी अध्यादेश लागू होने के बाद यह बदलाव जरूरी हो गया था. नए नियमों के मुताबिक भारतीय और विदेशी दोनों श्रेणी के शोधार्थियों को पीएचडी प्रवेश की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही हॉस्टल में रहने की अनुमति मिलेगी. शोध जमा करने के समय किसी प्रकार का बकाया नहीं होना चाहिए और आवेदन के दौरान हॉस्टल खाली करना अनिवार्य होगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद किसी भी परिस्थिति में हॉस्टल प्रवास नहीं बढ़ाया जाएगा.

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