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उर्वरक उपयोग में 50% कटौती से बदल सकती है भारत की कृषि तस्वीर

Brief By Newsbrief / 2:12 PM on 14 May 2026


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों से रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में 50 प्रतिशत तक कमी लाने की अपील की है. इस सुझाव को केवल सामान्य सलाह नहीं, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान वैज्ञानिक एनपीके अनुपात 4:2:1 को अपनाएं, तो देश की खेती व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है.

वर्तमान में भारत में उर्वरकों का असंतुलित उपयोग देखा जा रहा है, जहां नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का अनुपात 9.3:3.5:1 तक पहुंच गया है. यह स्थिति मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है और उत्पादन क्षमता पर भी असर डाल रही है. यूरिया की वार्षिक खपत लगभग 360 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है, जिसके कारण देश को बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर रहना पड़ता है.

अगर संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाया जाए, तो यूरिया की मांग घटकर लगभग 240–250 लाख मीट्रिक टन तक सीमित हो सकती है. इससे भारत न केवल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचा सकता है, बल्कि अतिरिक्त उत्पादन को निर्यात करने की स्थिति में भी आ सकता है.

इसी तरह डीएपी की खपत में भी उल्लेखनीय कमी संभव है. वर्तमान असंतुलन को सुधारने पर इसके आयात में लगभग 70% तक गिरावट आ सकती है. इससे कृषि लागत घटेगी और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी.

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अधिक उर्वरक उपयोग न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है.

सरकार द्वारा जारी सॉइल हेल्थ कार्ड और अन्य योजनाओं के बावजूद जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. यदि किसानों को सही तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिले, तो भारत उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि वैश्विक निर्यातक भी बन सकता है.

इस तरह प्रधानमंत्री की अपील को एक आर्थिक और पर्यावरणीय सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका प्रभाव दीर्घकाल में कृषि व्यवस्था को मजबूत बना सकता है.

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