Brief By Newsbrief / 12:21 PM on 16 Jan 2026
हमारे शरीर की कई बीमारियों की जड़ खून से जुड़ी होती है। यदि रक्त शुद्ध न हो, तो त्वचा रोग, कब्ज, अपच और संक्रमण जैसी समस्याएं बार-बार परेशान करती हैं। आयुर्वेद में खून को प्राकृतिक रूप से साफ रखने के लिए चिरायता को बेहद उपयोगी जड़ी-बूटी माना गया है।
चिरायता एक कड़वी लेकिन असरदार औषधि है, जो बाजार में बहुत ही सस्ते दाम पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है। आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार यह रक्त में जमा गंदगी और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होती है। नियमित और सीमित मात्रा में सेवन करने से कब्ज, पेट की समस्याओं, खुजली और त्वचा रोगों में राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार चिरायता की तासीर ठंडी होती है, इसलिए इसका सेवन गर्मी के मौसम में अधिक लाभकारी माना जाता है। इससे पेट को ठंडक मिलती है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है।
सेवन की विधि:
रात में एक गिलास के एक-चौथाई पानी में चिरायता की जड़ या पत्ते भिगो दें। सुबह छानकर खाली पेट पानी पी लें। 15–20 दिन तक सेवन पर्याप्त माना जाता है। अधिक मात्रा से बचना जरूरी है।