Back

दादा-दादी की जगह पोते को भी मिल सकती है अनुकंपा नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा हाई कोर्ट का फैसला

Brief By Jagran.com / 6:19 PM on 04 Oct 2026


अनुकंपा नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया आदेश से स्पष्ट हुआ है कि संबंधित सेवा नियमों में प्रावधान होने पर मृत कर्मचारी के पोते को भी 'निकट संबंधी' के रूप में नियुक्ति के लिए विचार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें रेलवे को मृत महिला कर्मचारी के पोते जितेन्द्र वर्मा के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया गया था. न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने 28 सितंबर को केंद्र सरकार और रेलवे की विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का उचित आधार नहीं है.

मामला पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में हेल्पर-2/खलासी के पद पर कार्यरत छमा बाई से जुड़ा है. उनके पति की 2002 और बेटे की 2006 में मृत्यु हो गई थी. इसके बाद उन्होंने अपने पोते जितेन्द्र का पालन-पोषण किया. छमा बाई की 19 जून 2016 को नौकरी के दौरान मृत्यु हो गई. जितेन्द्र का नाम 2007 में ही उनके सर्विस रिकॉर्ड में उत्तराधिकारी या नामिनी के रूप में दर्ज था. उसने 2018 में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र भी हासिल किया और दादी की जगह अनुकंपा नियुक्ति मांगी. रेलवे ने प्रमाणपत्र को केवल सेवानिवृत्ति संबंधी बकाया भुगतान तक सीमित मानते हुए नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया. जितेन्द्र ने खुद को छमा बाई का गोद लिया बेटा भी बताया था, जिसकी वैधता पर रेलवे ने सवाल उठाए.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 के फैसले में रेलवे की अनुकंपा नियुक्ति नीति का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसका लाभ केवल पुत्र, पुत्री, विधवा या विधुर तक सीमित नहीं है. निर्धारित शर्तों के तहत 'निकट संबंधी' और वैध रूप से गोद लिए गए बच्चों पर भी विचार किया जा सकता है. कोर्ट के मुताबिक, जितेन्द्र को दत्तक पुत्र न माना जाए, तब भी पोता होने के कारण उसके दावे पर निकट संबंधी की श्रेणी में विचार किया जा सकता है. हाई कोर्ट ने रेलवे को 30 दिन में कार्रवाई करने और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का निर्देश दिया था, जिसे चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी.

Read more on Jagran.com