Brief By Jagran.com / 6:17 PM on 04 Oct 2026
बडगाम में हाल ही में हुई मुठभेड़ में मारे गए पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को लेकर नया खुलासा सामने आया है. सेना के अधिकारियों के अनुसार, एक पुरानी मुठभेड़ में गोली लगने के बाद मूसा ने अपने घावों के उपचार के लिए शहद का इस्तेमाल किया था. बताया गया है कि राजौरी में 'ऑपरेशन शेरुवाली' के दौरान सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में उसे गोली लगी थी. सर्च ऑपरेशन के दौरान वह चारों तरफ से घिर गया था और उसे किसी तरह की नियमित मेडिकल सहायता नहीं मिल पा रही थी. ऐसी स्थिति में उसने कथित तौर पर घाव पर शुद्ध शहद लगाया था.
अधिकारियों के मुताबिक, मूसा ने घाव में संक्रमण को रोकने और उसे ठीक करने के उद्देश्य से शहद का इस्तेमाल किया. उसके पास से बरामद एक मोबाइल फोन की जांच के दौरान कुछ ऐसी तस्वीरें मिलने का दावा किया गया, जिनमें उसके घावों पर शहद से उपचार किए जाने के संकेत दिखाई दिए. हालांकि, गंभीर गोली के घाव में शहद का इस्तेमाल आधुनिक चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाता और ऐसे मामलों में पेशेवर चिकित्सा सहायता जरूरी होती है. अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल सपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण मूसा ने अपने स्तर पर इस तरीके का सहारा लिया था.
हाशिम मूसा को सुरक्षा एजेंसियां एक पाकिस्तानी आतंकवादी और शीर्ष कमांडर के रूप में पहचानती थीं. अधिकारियों के अनुसार, वह पाकिस्तान सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) में कमांडो भी रह चुका था. बाद में वह आतंकी गतिविधियों से जुड़ गया और जम्मू-कश्मीर में सक्रिय था. सुरक्षाबल काफी समय से उसकी तलाश कर रहे थे. बडगाम में हुई मुठभेड़ के दौरान भारतीय सुरक्षाबलों ने उसे मार गिराया. इसके बाद उसके पास से मिले सामान और मोबाइल फोन की जांच की गई, जिसमें उसके घायल होने और घावों के उपचार से जुड़ी तस्वीरें सामने आने का दावा किया गया है.