Brief By Jagran.com / 12:19 PM on 03 Oct 2026
यरुशलम में फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट से जुड़ा मामला सामने आने के बाद इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, सवाल यह है कि इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले ओमान का एक पायलट तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट के चालक दल का हिस्सा कैसे बना. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में भारतीय पायलट स्मित मच्छर के साथ ओमान के हमम अल-हम्मामी को-पायलट के रूप में मौजूद थे. रिपोर्ट में को-पायलट पर विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप भी लगाया गया है. दावा है कि भारतीय पायलट ने स्थिति संभालते हुए विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बचाई.
घटना के बाद ओमानी पायलट के इजरायल पहुंचने को लेकर सुरक्षा नियमों पर चर्चा तेज हो गई. रिपोर्ट के अनुसार, 2020 के अब्राहम समझौते के बाद बनाए गए नियमों के तहत उन देशों के पायलटों के इजरायल में उड़ान भरने पर रोक है, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं. ओमान और इजरायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं. इसके बावजूद चैनल 12 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल के वर्षों में विदेशी एयरलाइंस के लिए काम करने वाले एक दर्जन से ज्यादा ओमानी पायलट इजरायल आ चुके हैं. इस खुलासे के बाद मौजूदा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायल की शिन बेट सुरक्षा सेवा ने फ्लाईदुबई के पायलटों की राष्ट्रीयता या उनके बैकग्राउंड की अलग से जांच नहीं की थी. इसके बजाय एयरलाइन को निर्देश दिया गया था कि इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देशों के पायलटों को ऐसी उड़ानों में तैनात न किया जाए. अब इस मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि नियम होने के बावजूद उनका पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी और ओमानी पायलटों को तेल अवीव की उड़ानों में तैनाती की अनुमति कैसे मिली.