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झारखंड में हीमोफीलिया मरीजों पर दवा संकट, सरकारी अस्पतालों में फैक्टर-8 और फैक्टर-9 का स्टॉक खत्म

Brief By Newsbrief / 11:05 AM on 03 Aug 2026


 

झारखंड में हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं. राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स और रांची सदर अस्पताल सहित चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू, गढ़वा, धनबाद, गोड्डा, जमशेदपुर और चाईबासा के सरकारी अस्पतालों में पिछले दो-तीन महीनों से फैक्टर-8 और फैक्टर-9 जैसी जीवनरक्षक दवाओं का स्टॉक खत्म है. इन दवाओं की अनुपलब्धता के कारण मरीजों और उनके परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.

हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर में खून का थक्का बनने की क्षमता प्रभावित होती है. ऐसे मरीजों के लिए फैक्टर-8 और फैक्टर-9 दवाएं बेहद जरूरी होती हैं. चिकित्सकों के अनुसार, समय पर दवा नहीं मिलने पर मामूली चोट या अंदरूनी रक्तस्राव भी जानलेवा साबित हो सकता है. खासकर बच्चों के लिए यह स्थिति अधिक गंभीर मानी जाती है.

दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई मरीज निजी मेडिकल दुकानों से बेहद महंगी कीमत पर दवा खरीदने को मजबूर हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह संभव नहीं है. ऐसे मरीज इलाज में देरी होने से गंभीर जोखिम झेल रहे हैं.

हीमोफीलिया एक्टिविस्ट संतोष जायसवाल ने आरोप लगाया है कि दवा आपूर्ति करने वाली एजेंसी की लापरवाही के कारण राज्य के सभी डे-केयर सेंटरों का स्टॉक खत्म हो गया है. उनका कहना है कि मरीज लगातार अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है. उन्होंने सरकार से तत्काल दवा की आपूर्ति सुनिश्चित करने और मरीजों को राहत देने की मांग की है.

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