Brief By Newsbrief / 3:13 PM on 09 Jul 2026
बरसात शुरू होते ही झारखंड और छत्तीसगढ़ के बाजारों में रुगड़ा की बहार आ जाती है. 'देशी मटन' के नाम से प्रसिद्ध यह खास वन उपज साल में केवल दो महीने मिलती है. रुगड़ा, जिसे कई जगह पुटका भी कहा जाता है, सखुआ (साल) के पेड़ों के नीचे प्राकृतिक रूप से उगता है. आदिवासी महिलाएं इसे जंगलों से चुनकर बाजारों में बेचती हैं. इसकी कीमत आमतौर पर 400 से 500 रुपये प्रति किलो रहती है, जबकि मांग बढ़ने पर यह 800 से 1000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है.
रुगड़ा अपने अनोखे स्वाद के साथ-साथ पौष्टिक गुणों के लिए भी जाना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार माना जाता है. सावन के दौरान नॉनवेज से परहेज करने वाले लोगों के लिए भी यह स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प माना जाता है.
रुगड़ा बनाने के लिए सबसे पहले इसे कई बार पानी से अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है और हल्का खुरच लिया जाता है. इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म कर प्याज, अदरक और लहसुन को भूनें. फिर हल्दी, नमक, जीरा और देसी टमाटर डालकर मसाला तैयार करें. अब रुगड़ा डालकर अच्छी तरह भूनें और स्वाद बढ़ाने के लिए मीट मसाला मिलाएं. थोड़ा पानी डालकर 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. तैयार रुगड़ा की सब्जी रोटी या चावल के साथ परोसें और झारखंड के पारंपरिक स्वाद का आनंद लें.