Brief By Newsbrief / 2:07 PM on 04 Jul 2026
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि भांग (कैनबिस) को मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (NDPS) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित पदार्थ नहीं माना गया है. अदालत ने कहा कि इस अधिनियम के तहत भांग रखने या उससे जुड़े मामले में दंड का प्रावधान लागू नहीं होता.
न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने यह फैसला सुनील सिंह द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान सुनाया. अदालत ने मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात वर्ष की कठोर कारावास की सजा और 50 हजार रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार भांग को प्रतिबंधित मादक पदार्थों की श्रेणी में नहीं रखा गया है. इसलिए इस अधिनियम के तहत दोषसिद्धि और सजा टिक नहीं सकती.
यह फैसला ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग से संबंधित आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, किसी भी मामले में अन्य लागू कानूनों या परिस्थितियों के आधार पर अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं. अदालत के इस फैसले को राज्य में एनडीपीएस अधिनियम की व्याख्या के लिहाज से एक अहम निर्णय माना जा रहा है.