Brief By Newsbrief / 1:36 PM on 02 Jun 2026
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर आंतरिक असंतोष और गुटबाजी की खबरें तेजी से सुर्खियां बटोर रही हैं. हालिया हस्ताक्षर विवाद के बाद पार्टी से निष्कासित किए गए दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को लेकर राज्य के सियासी गलियारों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की अटकलें लगाई जा रही हैं. सूत्रों का दावा है कि तृणमूल के करीब 50 विधायक इन दोनों निष्कासित नेताओं के निरंतर संपर्क में हैं और पार्टी के भीतर ही एक नया व अलग शक्ति केंद्र स्थापित करने की गंभीर कोशिशें चल रही हैं.
इस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत उस शिकायत से हुई थी, जिसमें विपक्ष के नेता के समर्थन से जुड़े एक प्रस्ताव पर कुछ विधायकों के जाली (फर्जी) हस्ताक्षर होने का आरोप लगाया गया था. इस शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने एक आधिकारिक मामला दर्ज कराया था, जिसकी जांच वर्तमान में सीआईडी (CID) कर रही है. इस बीच, पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा दोनों विधायकों की भूमिका पर खुले तौर पर सवाल उठाने और जांच में उनके नाम सामने आने के तुरंत बाद, तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत और संदीपन को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दल से निष्कासित कर दिया था.
अब राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि कोलकाता में हाल ही में एक गोपनीय बैठक हुई थी, जिसमें तृणमूल के कई असंतुष्ट विधायक शामिल हुए थे. चर्चा है कि ये विधायक जल्द ही खुद को 'वास्तविक तृणमूल' बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक अलग गुट का प्रस्ताव सौंप सकते हैं, जिसका मुख्य चेहरा ऋतब्रत बनर्जी को बनाए जाने की संभावना है. हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष इसे तृणमूल के भीतर बढ़ते असंतोष का साफ संकेत मान रहा है, जो भविष्य में पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है.