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BJP में अब बाहरी नेता भी बन रहे मुख्यमंत्री, RSS बैकग्राउंड जरूरी नहीं

Brief By Newsbrief / 6:11 PM on 12 May 2026


नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी में अब ऊंचा पद पाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा होना अनिवार्य नहीं रह गया है। दूसरे दलों से भाजपा में शामिल होने वाले नेता भी अब प्रमुख पदों तक पहुंच रहे हैं। यहां तक कि कई राज्यों में मुख्यमंत्री की कुर्सी भी उनके हाथों में सौंप दी गई है।

असम में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस से भाजपा में आए थे। त्रिपुरा में सरकार चला रहे मानिक साहा का भी राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ। पश्चिम बंगाल में भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस छोड़कर पार्टी में आए और अब नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले राजद और जदयू में रह चुके हैं।

ये चारों नेता कांग्रेस, राजद, जदयू और तृणमूल कांग्रेस से आकर भाजपा में ताकतवर चेहरा बन गए हैं। कई को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तक की जिम्मेदारी मिली है। इससे साफ संदेश है कि भाजपा अब यह नहीं देखती कि नेता बाहर का है या भीतर का, RSS से आया है या किसी और पार्टी से।

पार्टी की नई सोच यही है कि अगर नेता में क्षमता, जनाधार और संगठन को आगे बढ़ाने की योग्यता है, तो उसे बड़ा पद मिल सकता है। हिमंत बिस्वा सरमा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जिन्होंने पूर्वोत्तर में भाजपा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

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