Brief By Newsbrief / 12:10 PM on 11 May 2026
भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया. पहली बार सोमनाथ मंदिर के 155 फीट ऊंचे शिखर कलश का 11 तीर्थ स्थलों से लाए गए 1100 लीटर पवित्र जल से भव्य जलाभिषेक किया गया. सोमनाथ अमृत महोत्सव के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक और धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए. मंदिर के शिखर पर स्थापित किए जाने वाले विशेष कलश का वजन जल भरने के बाद करीब 1.86 टन हो गया. आधुनिक तकनीक से तैयार इस कलश की क्षमता 1100 लीटर है, जबकि खाली अवस्था में इसका वजन लगभग 760 किलोग्राम बताया गया. शिखर तक इसे पहुंचाने के लिए 350 टन क्षमता वाली विशाल ऑल-टेरेन क्रेन का इस्तेमाल किया गया ताकि मंदिर की प्राचीन संरचना पर किसी प्रकार का दबाव न पड़े. प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में मंदिर के शिखर पर नूतन ध्वजारोहण भी किया गया. इसके बाद उन्होंने भगवान सोमनाथ की महापूजा में हिस्सा लिया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का शिखर और उस पर स्थित कलश ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि कुंभाभिषेक के जरिए पवित्र जल और मंत्रोच्चार से मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनर्जीवित किया जाता है. आज का दिन इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आधुनिक सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की थी. इस ऐतिहासिक घटना के 75 वर्ष पूरे होने पर यह आयोजन किया गया. साथ ही, वर्ष 1026 में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त किए जाने की घटना के 1000 वर्ष 2026 में पूरे होंगे. ऐसे में यह भव्य अभिषेक दुनिया को यह संदेश देता है कि सोमनाथ हर विनाश के बाद और अधिक भव्यता के साथ पुनर्जीवित होता है.