Brief By Newsbrief / 2:38 PM on 04 Apr 2026
असम चुनाव के बाद झारखंड की सियासत में सत्ता समीकरण बदलने की चर्चा तेज हो गई है। इसकी शुरुआत डुमरी विधायक जयराम महतो के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में राज्य में गैर-कांग्रेस और गैर-भाजपा सरकार बन सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नए समीकरण में उनकी भूमिका अहम हो सकती है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई।
इसी बीच झामुमो और कांग्रेस के बीच बढ़ती बयानबाजी ने इन अटकलों को और बल दिया। असम चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक रुख, राज्यसभा सीटों को लेकर खींचतान और संगठनात्मक वर्चस्व की लड़ाई ने गठबंधन के भीतर दरार की चर्चा को तेज किया है।
सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कांग्रेस और भाजपा से अलग नई सरकार बनाने का सुझाव देते हुए बिना शर्त समर्थन देने की बात कही। मौजूदा आंकड़ों में झामुमो (34), राजद (4), माले (2) और अन्य सहयोगियों के साथ बहुमत का आंकड़ा छूना मुश्किल नहीं दिखता। ऐसे में यदि कांग्रेस अलग होती है, तो सिर्फ कुछ विधायकों के समर्थन से नया समीकरण बन सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये बयान सिर्फ अटकलें नहीं बल्कि आगामी चुनावों से पहले शक्ति संतुलन साधने की रणनीतिक कवायद भी हो सकते हैं।