Brief By Newsbrief / 11:13 AM on 03 Mar 2026
आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी टाटा स्टील कभी गहरे आर्थिक संकट से गुजर रही थी। 117 वर्षों के इतिहास में एक ऐसा दौर भी आया जब कंपनी के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के लिए धन नहीं बचा था। उस समय हालात इतने खराब हो गए थे कि कंपनी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था।
ऐसे कठिन समय में लेडी मेहरबाई टाटा ने अद्भुत साहस और त्याग का परिचय दिया। उन्होंने अपने बहुमूल्य हीरे-जवाहरात गिरवी रख कंपनी को आर्थिक सहारा दिया। कहा जाता है कि उनके इस कदम से कंपनी को मंदी के दौर से उबरने में बड़ी मदद मिली।
लेडी मेहरबाई, सर दोराबजी टाटा की पत्नी थीं और उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के टाटा समूह की साख बचाने का फैसला लिया। इस प्रेरणादायक घटना का उल्लेख लेखक हरीश भट्ट ने अपनी पुस्तक टाटा स्टोरी में किया है। उनका यह त्याग आज भी टाटा स्टील के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।