Brief By Newsbrief / 8:54 PM on 15 Apr 2024
रांची; अक्सर रिम्स अस्पताल से मरीजों की शिकायतें आती है,कि रिम्स के चिकित्सक दवाईयां बजट के बाहर की लिखते हैं. साथ ही वो ऐसी दवाइयां पर्ची में लिखते हैं जो हमें न तो जनऔषधि केंद्र में मिलती हैं और न ही अमृत फार्मर्सी से मिल पाती हैं. डॉक्टरो की लिखी दवा बस निजी दवा दुकानो में ही मिलती हैं.लेकिन अब इन सभी क़े बीच रिम्स प्रबंधन ने ओपीडी के सभी डॉक्टरों को मरीजों को दवा लिखने की कड़ी गाइडलाइन जारी कर दी गई है. और अब इसका असर भी देखा जा रहा हैं. बता दें कि अकसर डॉक्टर पर्ची में मरीजों को बाहरी दवा लिख कर देते थे और बाहरी दवा दुकानों को लाभ पहुंचाते हैं जिस कारण मजबूरन मरीज क़े परिजनों को निजी दवा दुकानों से दवाईयां लेनी पड़ रही थी. लेकिन रिम्स प्रबंधन क़े नकेल कसने क़े बाद डॉक्टर अब सही लाइन में आ कर जनरिक और अमृत फार्मेसी में उपलब्ध दवाईयां लिखने लगे है. और डॉक्टर कि लिखी हुई पर्ची अब निजी दुकानों में जानी कम हों गई है, जिससे मरीज क़े परिजनो को थोड़ी राहत मिल रही हैं.
वहीं इन सभी क़े बाद रिम्स प्रबंधन का कहना हैं कि डॉक्टर द्वारा मरिजों को लिखी गई दवा पर्ची की लगातार मॉनिटरिंग कि जा रही हैं साथ ही चिकत्सकों को कहा गया हैं कि अगर रिम्स क़े स्टोर में दवाइयां ना हों तो उन्हें जनरेटिक दवाइयां लिखें और अगर किसी मरीज क़े बड़ी बीमारी का निदान करने क़े लिए अगर ब्रांडेड दवाइयां लिखनी हों तो अमृत फार्मेसी में उपलब्ध दवा लिखें साथ ही उन्होनें कहा कि डॉक्टरों को यह भी निर्देश दिया गया है कि मरीजों को लिखी गई पर्ची में अपना नाम और मुहर लगाना अनिवार्य है.और रिम्स क़े सभी डॉक्टरों को हिदायत भी दी गई हैं कि अगर मरीजों को निजी दवा दुकानों की मेडिसिन लिखी जाएगी तो उन पर कड़ी कारवाई की जाएगी.