Brief By Newsbrief / 12:05 AM on 13 Jan 2023
40 लाख रुपये का इनामी नक्सली माड़वी हिड़मा ढेर, सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता
टीएनपी डेस्क(TNP DESK): 40 लाख रुपये का इनामी नक्सली माड़वी हिड़मा के मारे जाने की खबर है. बताया जा रहा है कि तेलागंना बीजापुर की सीमा पर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल और एलीट ग्रेहाउंड् की संयुक्त कार्रवाई में माड़वी हिड़मा को मार गिराया गया है. सुरक्षा बलों ने 43 वर्षीय माओवादी हिड़मा के बारे में सूचना देने वालों को 40 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा की थी.
लम्बे समय से सुरक्षा बलों को थी हिड़मा की तलाश
यहां बता दें कि सुरक्षा बलों को लम्बे समय से हिड़मा की तलाश थी. वह पुलिस बल पर कई हमलों का आरोपी था, 3 अप्रैल 2021 को बस्तर जिले में 22 सुरक्षाकर्मियों की हत्या में भी हिड़मा का नाम शामिल था. माना जाता है कि हिड़मा इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता था. 22 सुरक्षाकर्मियों की शहादत के साथ ही इस हमले में कुल 31 जवान घायल भी हुए थें. इसके साथ ही वर्ष 2007 में उरपाल मेटा में सीआरपीए पर हमले में भी हिड़मा को मुख्य साजिशकर्ता बताया जाता है. छत्तीसगढ़ के साथ ही तेलांगना और आडिशा में भी उसका आंतक कायम था, इन राज्यों के सुदूरवर्ती इलाकों में हिड़मा की तूती बोलती थी.
हमले के दौरान अपने दस्ते का नेतृत्व किया करता था हिड़मा
हिड़मा को काफी दुस्साहसी और गुरिल्ला युद्ध का सफल रणनीतिकार माना जाता था, उसकी रणनीति बेहद कारगार और सफल होती थी. अक्सर वह अपनी रणनीति में पुलिस बलों को फंसा लिया करता था, यही कारण है कि वह लम्बे समय से सुरक्षा बलों के निशाने पर था.
सुकमा से निकल हिड़मा ने सम्भाला था नक्सली दस्ता का नेतृत्व
माडवी हिड़मा मूल रुप से सुकमा जिले का सुदूरवर्ती गांव पुवर्ती का रहने वाला था. यह इलाका आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरुम है, आज भी विकास की किरण यहां नहीं पहुंची है. इसी इलाके से वर्ष 1996-97 में हिड़मा ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में नक्सली संगठन सीपीआई माओवादी को ज्वाईन किया था. इसके पहले वह अपने गांव में खेतीबारी किया करता था.
धीरे-धीरे बढ़ता गया माडवी हिड़मा का संगठन में कद
वर्ष 1996-97 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद से ही हिड़मा का संगठन में कद लगातार बढ़ता गया, बार-बार उसे प्रोमोशन देकर नयी जिम्मेवारियां दी गयी, उसकी रणनीति से खुश होकर केन्द्रीय नेतृत्व उसे लगातार बढ़ाता रहा.
वर्ष 2008-09 में हिड़मा को नक्सली संगठना में पहली बटालियन का कमांडर बनाया गया. 2011 में दंडकारण्यम को विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य के रूप में उसकी नियुक्ति की गयी. उसके बाद उसे केंद्रीय समिति में महत्वपूर्ण जिम्मेवारी दी