Brief By Newsbrief / 11:13 PM on 11 Oct 2022
गुमला (GUMLA): गुमला जैसे आदिवासी बहुल गरीब इलाके से निकलकर अगर कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाए तो समझा जा सकता है कि यह कितनी बड़ी उपलब्धि होगी. लेकिन जरा सोचिए कि अगर कोई बच्ची अपनी प्रतिभा के बल पर फीफा अंडर 17 महिला वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का नेतृत्व करने वाली हो, बावजूद इसके उसके परिवार का जीवन बदहाली की दौर से गुजरे तो यह उस राज्य के लिए दुर्भाग्य की बात होगी.
बेटी ने दिलाई सड़क निर्माण की स्वीकृति, पिता कर रहे मजदूरी
हम बात कर रहे है अपनी कठिन मेहनत और प्रतिभा के बल पर झारखंड के गुमला जिला के बिशुनपुर ब्लॉक की रहने वाली अष्टम उरांव की. जो अपनी प्रतिभा के बल पर कठिन मेहनत से फीफा वर्ल्ड कप अंडर 17 महिला वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का नेतृत्व कर रही है. लेकिन राज्य में सूबे की सरकार की उदासीनता देखिये की आज भी अष्टम उरांव के माता पिता गरीबी के कारण गांव को जाने वाली बन रही सड़क में मजदूरी का काम कर को मजबूर है. जिस सड़क का निर्माण प्रशासनीक स्वीकृति के बाद कराई जा रही है. उसी सड़क में गरीबी के कारण अष्टम के माता-पिता काम कर अपनी जीविका चला रहे है. अष्टम के घर की दीवार पर कई मैडल टगा हुआ है, जो अष्टम की प्रतिभा को साबित करने के लिए काफी है. अष्टम के पिता हीरो उरांव और मां तारा देवी ने कहा कि उनकी बेटी ने जो मुकाम हासिल की है उससे वह काफी खुशी है. वही उन्होंने कहा कि शुरू से ही उनकी बेटी काफी उत्साह के साथ खेल के प्रति आकर्षित थी. वहीं मजदूरी किये जाने की बात पर उन्होंने कहा कि अपने पेट को पालने के लिए काम करना ज़रूरी है. उन्होंने बताया कि बेटी ने जब मुकाम हासिल किया तब जाकर प्रशासन ने बिशुनपुर के बनारी गोरा टोली से उसके गांव तक के लिए सड़क निर्माण की स्वीकृति दी. उसी सड़क के निर्माण में वह काम कर दो पैसा की कमाई कर रहे है.
सांसद के प्रतिनिधि ने परिजनों से की मुलाात
परिवार की इतनी बदहाली की स्तिथि उस बेटी की है जिसने ना केवल गुमला बल्कि पूरे झारखंड के नाम रोशन किया है. इस बात पर चिंता व्यक्त करते हुई सांसद सुदर्शन भगत के प्रतिनिधि त्रिलोकी चौधरी परिवार से मिलने उसके गांव पहुंचे. उन्होंने इस परिस्तिथि को देखकर सूबे को हेमंत सरकार पर निशाना साधा उन्होंने कहा कि सरकार केवल खिलाड़ियों का हितैसी होने का दिखावा करती है.
परिवार की स्थिति को बेहतर करने की कोशिश में जुटी प्रशासन
वहीं पूरे मामले को लेकर जब जिला के उपायुक्त सुशांत गौरव से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह जिला के लिए गौरव का विषय है, कि अष्टम उरांव काफी विपरीत परिस्तिथि से निकलकर उस मुकाम पर पहुंची है जहां आज सभी का ध्यान उसकी ओर जा रहा है. वहीं उन्होंने कहा कि उस परिवार की आर्थिक स्तिथि को कैसे बेहटर बनाया जायेगा इसको लेकर प्रशासनिक स्तर के साथ ही सरकार के स्तर पर भी कोशिश की जाएगी.
खेल पदाधिकारी टीवी सेट लेकर पहुंची अष्टम के घर
वहीं अब जब मामला पूरी तरह चर्चित हो गया है, तो जिला प्रशासन वह सब कर रही है जिसकी चिंता अब तक उसे नहीं थी. प्रशासन की ओर से जिला खेल पदाधिकारी हेमलता बूम टीवी सेट लेकर उसके घर पहुंची और उसे सेट करवाया. ताकि अष्टम का मैच उसके परिवार वाले देख सकें. उन्होंने कहा कि सरकार अष्टम की चिंता कर रही है.
नज़र इनायत की ज़रूरत
अब देखने वाली बात होगी की अतंरराष्ट्रिय स्तर पर देश का नाम रौशन करने वाली अष्टम उरांव के परिवार की बदहाली के तरफ सरकार का ध्यान कब जाता है.