Brief By Newsbrief / 6:06 PM on 27 Jun 2022
जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): कौन नहीं चाहता कि उसका अपना घर हो. फिर चाहे वो इंसान हो या जानवर. सभी को स्वस्थय रहने के लिए प्यार और बेहतर एनवायरनमेंट की ज़रुरत होती है. इंसान तो अपने लिए फिर भी अपने लिए अपना कहने वाला आशियाना बना लेता है, लेकिन बेज़ुबान जानवार सड़क को ही अपना घर मानने पर मजबूर होते है. ऐसे में अगर सड़क पर भटक रहे जानवरों को घर मिल जाए, तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है. इसी नेक ख्याल के साथ स्ट्रे आर्मी चैरिटेबल ट्रस्ट ने सड़क के कुत्तों और बिल्लियों को घर दिलाने की मुहिम चलाई. इस कार्यक्रम के ज़रिए 9 देसी कुत्ते और बिल्लियों को घर मिला. एनजीओ (NGO) ने "हम देसी तो हमारे कुत्ते भी देसी होने चाहिए", नारे को एक मुहिम का स्वरूप दिया है. जो जमशेदपुर शहर में इन दिनों काफी चर्चे में है.
आर्थिक सहायता की उम्मीद
एनजीओ (NGO) से जुड़े युवाओं ने अब तक 50 से भी ज़्यादा देसी कुत्ते और बिल्लियों को घर दिलाया है. ये युवा किसी तरह अपनी जेब खर्च से रोजाना 100 से अधिक कुत्तों को पिछले 2 साल से खाना खिलाते हैं. इसके साथ ही सेल्फ फाइनैनस से अनगिनथ घायल और ज़ख्मी जानवरों का इलाज कराते हैं. इस ट्रस्ट को लोगों का लगातार सहयोग और सराहना मिलता रहा है. यही वजह है कि अब यह ट्रस्ट और बड़े पैमने पर काम करना चाहता है. इसके लिए इन्हें नगरवासियों से आर्थिक सहायता की उम्मीद हैं.